
क्यों अधरों पर मुस्कान लिए
नैनो से नीर बहाते हो ?
कुछ पाकर खो दिया है
या कुछ ना पाने पर रोते हो?
क्या कुछ सपने टूट गए
या फिर अपने रूठ गए ?
उम्मीदों का बाँध टूट गया
या कोई सहाय्य छूट गया ?
यह जीवन एकल खेल है
मिले ना संगी साथ
तुम्ही आत्मीय तुम्ही अराति
तुम्ही उषा हो तुम्ही हो रात
मिलना -बिछड़ना , खिलना – बिखरना
आश -निराश , दूर और पास
यह जीवन द्वन्दों का संगम
विचरो जैसे उड़े विहंगम
तुम काल हो , महाकाल हो
तुम ख़ुद का अनुसंधान करो
संयोग से जीवन है पाया
इसे यूँ फ़िज़ूल ना नाशाद करो ।
